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ramayan 2.24.27-28h: अतः स्त्री को चाहिए कि वह सदैव अपने पति की सेवा करे, उसके प्रति प्रिय रहे और उसके हित में सदैव तत्पर रहे। यही स्त्री का सनातन कर्तव्य है, जो वेदों और लोकों में विदित है। श्रुतियों और स्मृतियों में भी इसका उल्लेख है।॥27 1/2॥   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  2.24.27-28h 
शुश्रूषामेव कुर्वीत भर्तु: प्रियहिते रता॥ २७॥
एष धर्म: स्त्रिया नित्यो वेदे लोके श्रुत: स्मृत:।
 
 
अनुवाद
अतः स्त्री को चाहिए कि वह सदैव अपने पति की सेवा करे, उसके प्रति प्रिय रहे और उसके हित में सदैव तत्पर रहे। यही स्त्री का सनातन कर्तव्य है, जो वेदों और लोकों में विदित है। श्रुतियों और स्मृतियों में भी इसका उल्लेख है।॥27 1/2॥
 
‘Therefore, a woman should always serve her husband by being dear to him and always being ready to do good to him. This is the eternal duty of a woman, which is known in the Vedas and the world. This is also mentioned in the Shrutis and Smritis.॥ 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)