vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना
»
श्लोक 26-27h
श्लोक
2.24.26-27h
भर्तु: शुश्रूषया नारी लभते स्वर्गमुत्तमम्॥ २६॥
अपि या निर्नमस्कारा निवृत्ता देवपूजनात्।
अनुवाद
जो स्त्री अन्य देवताओं की पूजा-अर्चना से विरत रहती है, वह भी केवल अपने पति की सेवा करके परम स्वर्ग को प्राप्त कर सकती है॥26 1/2॥
‘A woman who stays away from praying and worshipping other gods can also attain the supreme heaven by merely serving her husband.॥ 26 1/2॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×