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ramayan 2.24.26-27h: जो स्त्री अन्य देवताओं की पूजा-अर्चना से विरत रहती है, वह भी केवल अपने पति की सेवा करके परम स्वर्ग को प्राप्त कर सकती है॥26 1/2॥   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  2.24.26-27h 
भर्तु: शुश्रूषया नारी लभते स्वर्गमुत्तमम्॥ २६॥
अपि या निर्नमस्कारा निवृत्ता देवपूजनात्।
 
 
अनुवाद
जो स्त्री अन्य देवताओं की पूजा-अर्चना से विरत रहती है, वह भी केवल अपने पति की सेवा करके परम स्वर्ग को प्राप्त कर सकती है॥26 1/2॥
 
‘A woman who stays away from praying and worshipping other gods can also attain the supreme heaven by merely serving her husband.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)