Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.24.22-23h: 'जब तक बुद्धिमान जगदीश्वर महाराज दशरथ जीवित हैं, तब तक हमें अपने को अनाथ नहीं समझना चाहिए। भरत भी बड़े धर्मात्मा हैं। वे सब प्राणियों से मधुर वचन बोलते हैं और सदैव धर्म परायण रहते हैं; इसलिए वे आपका अनुसरण करेंगे और आपकी सेवा करेंगे।॥ 22 1/2॥ | ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ह्यनाथा वयं राज्ञा लोकनाथेन धीमता।
भरतश्चापि धर्मात्मा सर्वभूतप्रियंवद:॥ २२॥
भवतीमनुवर्तेत स हि धर्मरत: सदा।
अनुवाद
'जब तक बुद्धिमान जगदीश्वर महाराज दशरथ जीवित हैं, तब तक हमें अपने को अनाथ नहीं समझना चाहिए। भरत भी बड़े धर्मात्मा हैं। वे सब प्राणियों से मधुर वचन बोलते हैं और सदैव धर्म परायण रहते हैं; इसलिए वे आपका अनुसरण करेंगे और आपकी सेवा करेंगे।॥ 22 1/2॥
‘As long as the wise Jagadishwar Maharaja Dasharath is alive, we should not consider ourselves orphans. Bharata is also a very pious person. He speaks sweet words to all creatures and is always devoted to Dharma; therefore, he will follow you and serve you.॥ 22 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥