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ramayan 2.24.20-21: यह कहकर माता कौशल्या रोने लगीं। उन्हें इस प्रकार रोता देख श्रीराम भी रोने लगे और उन्हें सांत्वना देते हुए बोले- 'माता! जब तक स्त्री जीवित रहती है, उसका पति उसके लिए देवता और ईश्वर के समान होता है। महाराज आपके और मेरे दोनों के स्वामी हैं।'   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  2.24.20-21 
तां तथा रुदतीं रामो रुदन् वचनमब्रवीत्॥ २०॥
जीवन्त्या हि स्त्रिया भर्ता दैवतं प्रभुरेव च।
भवत्या मम चैवाद्य राजा प्रभवति प्रभु:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर माता कौशल्या रोने लगीं। उन्हें इस प्रकार रोता देख श्रीराम भी रोने लगे और उन्हें सांत्वना देते हुए बोले- 'माता! जब तक स्त्री जीवित रहती है, उसका पति उसके लिए देवता और ईश्वर के समान होता है। महाराज आपके और मेरे दोनों के स्वामी हैं।'
 
Saying this, mother Kausalya started crying. Seeing her crying like that, Shri Ram also started crying and while consoling her said- 'Mother! While a woman is alive, her husband is like a deity and God to her. Maharaj is the Lord of both you and me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)