Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.24.18: यह सुनकर पुत्र-प्रेमिनी कौसल्या के मुख से पुनः आँसू बहने लगे। उस समय वे अत्यन्त व्याकुल हो उठीं और अपने प्रिय पुत्र से बोलीं -॥18॥   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.24.18 
एवमुक्ता प्रियं पुत्रं बाष्पपूर्णानना तदा।
उवाच परमार्ता तु कौसल्या सुतवत्सला॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर पुत्र-प्रेमिनी कौसल्या के मुख से पुनः आँसू बहने लगे। उस समय वे अत्यन्त व्याकुल हो उठीं और अपने प्रिय पुत्र से बोलीं -॥18॥
 
On hearing this, tears again started flowing from the face of Kausalya who loved her son. She was very distressed at that time and said to her beloved son -॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)