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ramayan 2.24.14: श्री रामजी की यह बात सुनकर सत्कर्मों पर दृष्टि रखने वाली देवी कौशल्या अत्यन्त प्रसन्न हुईं और बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले श्री रामजी से बोलीं - 'ठीक है बेटा! मैं भी ऐसा ही करूँगी।'॥14॥   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.24.14 
एवमुक्ता तु रामेण कौसल्या शुभदर्शना।
तथेत्युवाच सुप्रीता राममक्लिष्टकारिणम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की यह बात सुनकर सत्कर्मों पर दृष्टि रखने वाली देवी कौशल्या अत्यन्त प्रसन्न हुईं और बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले श्री रामजी से बोलीं - 'ठीक है बेटा! मैं भी ऐसा ही करूँगी।'॥14॥
 
On hearing Shri Ram say this, Goddess Kausalya, who keeps an eye on good deeds, became very happy and said to Shri Ram, who performed great deeds without any effort - 'Okay son! I will do the same.'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)