Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.24.13: ‘जब तक मेरे पिता, ककुत्स्थ कुल के रत्न महाराज दशरथ जीवित हैं, तब तक तुम उनकी सेवा करो। पति की सेवा करना ही स्त्री का सनातन धर्म है।’॥13॥   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.24.13 
यावज्जीवति काकुत्स्थ: पिता मे जगतीपति:।
शुश्रूषा क्रियतां तावत् स हि धर्म: सनातन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘जब तक मेरे पिता, ककुत्स्थ कुल के रत्न महाराज दशरथ जीवित हैं, तब तक तुम उनकी सेवा करो। पति की सेवा करना ही स्त्री का सनातन धर्म है।’॥13॥
 
‘As long as my father, Maharaja Dasharath, the jewel of the Kakutstha clan, is alive, you should serve him. Serving one’s husband is the eternal religion for a woman.’॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)