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भर्तु: किल परित्यागो नृशंस: केवलं स्त्रिया:।
स भवत्या न कर्तव्यो मनसापि विगर्हित:॥ १२॥
अनुवाद
‘स्त्री के लिए पति का त्याग करना बड़ा ही क्रूर कर्म है। सज्जनों ने इसकी बहुत निंदा की है; अतः ऐसी बात का विचार भी तुम्हें कभी नहीं करना चाहिए।॥12॥
‘Abandoning one's husband is a very cruel act for a woman. Good men have condemned it very much; therefore you should never even think of such a thing.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥