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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.24.11 
कैकेय्या वञ्चितो राजा मयि चारण्यमाश्रिते।
भवत्या च परित्यक्तो न नूनं वर्तयिष्यति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'माता! कैकेयी ने राजा के साथ विश्वासघात किया है। मैं वन जा रहा हूँ। इस दशा में यदि आप भी उन्हें त्याग देंगी, तो निश्चय ही वे जीवित नहीं रह पाएँगे।' 11.
 
‘Mother! Kaikeyi has betrayed the king. I am going to the forest. In this condition, if you also abandon them, then surely they will not be able to survive. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)