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ramayan 2.24.10: माता कौशल्या की यह बात सुनकर भगवान् श्री रामजी ने अत्यंत दुःखी हुई अपनी माता से यह वचन कहे -॥10॥   |   ramayan सर्ग 2.24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.24.10 
यथा निगदितं मात्रा तद् वाक्यं पुरुषर्षभ:।
श्रुत्वा रामोऽब्रवीद् वाक्यं मातरं भृशदु:खिताम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
माता कौशल्या की यह बात सुनकर भगवान् श्री रामजी ने अत्यंत दुःखी हुई अपनी माता से यह वचन कहे -॥10॥
 
Having heard what mother Kausalya said, the Supreme Personality of Godhead, Sri Rama spoke to his mother who was deeply saddened by the following words:॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)