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ramayan 2.23.28: वीर! मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि जैसे समुद्र तट सागर को रोक लेता है, वैसे ही मैं तुम्हारी और तुम्हारे राज्य की रक्षा करूँगा। यदि मैं ऐसा न करूँ, तो वीरलोक का भागी न होऊँगा॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 2.23: लक्ष्मण की ओज भरी बातें, उनके द्वारा दैव का खण्डन और पुरुषार्थ का प्रतिपादन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.23.28 
प्रतिजाने च ते वीर मा भूवं वीरलोकभाक्।
राज्यं च तव रक्षेयमहं वेलेव सागरम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वीर! मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि जैसे समुद्र तट सागर को रोक लेता है, वैसे ही मैं तुम्हारी और तुम्हारे राज्य की रक्षा करूँगा। यदि मैं ऐसा न करूँ, तो वीरलोक का भागी न होऊँगा॥ 28॥
 
‘Veer! I vow that just like a coastline holds back the ocean, I will protect you and your kingdom. If I don’t do this, I will not be a part of Veerlok.॥ ​​28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)