श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 23: लक्ष्मण की ओज भरी बातें, उनके द्वारा दैव का खण्डन और पुरुषार्थ का प्रतिपादन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.23.24 
मद‍्बलेन विरुद्धाय न स्याद् दैवबलं तथा।
प्रभविष्यति दु:खाय यथोग्रं पौरुषं मम॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'जो कोई मेरी शक्ति के विरुद्ध खड़ा होगा, मेरे प्रचण्ड प्रयास उसे दुःख पहुँचा सकेंगे, किन्तु दैवी शक्ति उसे सुख नहीं पहुँचा सकेगी॥ 24॥
 
'Whoever stands against my power, my fierce efforts will be able to cause him pain, but divine power will not be able to bring him happiness.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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