vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 22: श्रीराम का लक्ष्मण को समझाते हुए अपने वनवास में दैव को ही कारण बताना और अभिषेक की सामग्री को हटा लेने का आदेश देना
»
श्लोक 23
श्लोक
2.22.23
ऋषयोऽप्युग्रतपसो दैवेनाभिप्रचोदिता:।
उत्सृज्य नियमांस्तीव्रान् भ्रश्यन्ते काममन्युभि:॥ २३॥
अनुवाद
भगवान् की प्रेरणा से प्रचण्ड तपस्वी मुनि भी अपने कठोर नियमों को त्याग देते हैं और काम तथा क्रोध से प्रेरित होकर अपनी मर्यादा का उल्लंघन करते हैं॥ 23॥
‘Even fierce ascetic sages, inspired by God, abandon their strict rules and, compelled by lust and anger, transgress their limits.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×