श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 22: श्रीराम का लक्ष्मण को समझाते हुए अपने वनवास में दैव को ही कारण बताना और अभिषेक की सामग्री को हटा लेने का आदेश देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.22.12 
मम प्रव्राजनादद्य कृतकृत्या नृपात्मजा।
सुतं भरतमव्यग्रमभिषेचयतां तत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'आज मेरे चले जाने से राजकुमारी कैकेयी प्रसन्न होकर निर्भय और चिन्तारहित होकर अपने पुत्र भरत का अभिषेक कर रही हैं ॥12॥
 
'Today, due to my departure, Princess Kaikeyi is pleased to anoint her son Bharat with no fear and no worries. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)