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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 22: श्रीराम का लक्ष्मण को समझाते हुए अपने वनवास में दैव को ही कारण बताना और अभिषेक की सामग्री को हटा लेने का आदेश देना
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श्लोक 11
श्लोक
2.22.11
अभिषेकविधानं तु तस्मात् संहृत्य लक्ष्मण।
अन्वगेवाहमिच्छामि वनं गन्तुमित: पुर:॥ ११॥
अनुवाद
'लक्ष्मण! इन सब कारणों से मैं अपने राज्याभिषेक का समारोह रोककर शीघ्रातिशीघ्र इस नगर को छोड़कर वन में जाना चाहता हूँ।
'Lakshmana! For all these reasons, I want to stop the ceremony of my coronation and leave this city for the forest as soon as possible.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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