श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 22: श्रीराम का लक्ष्मण को समझाते हुए अपने वनवास में दैव को ही कारण बताना और अभिषेक की सामग्री को हटा लेने का आदेश देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.22.10 
तस्यापि हि भवेदस्मिन् कर्मण्यप्रतिसंहृते।
सत्यं नेति मनस्तापस्तस्य तापस्तपेच्च माम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यदि यह राज्याभिषेक समारोह न रोका गया, तो मेरे पिता यह सोचकर दुःखी होंगे कि मैंने जो कहा वह सत्य नहीं था और उनकी वेदना मुझे सदैव सताती रहेगी॥ 10॥
 
If this coronation ceremony is not stopped, my father will be saddened thinking that what I said was not true and his anguish will continue to torment me forever.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)