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ramayan 2.21.43: 'वीर! अतः मैं अपने पिता की आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकता; क्योंकि पिता की आज्ञा से ही कैकेयी ने मुझे वन जाने का आदेश दिया था।'   |   ramayan सर्ग 2.21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.21.43 
सोऽहं न शक्ष्यामि पुनर्नियोगमतिवर्तितुम्।
पितुर्हि वचनाद् वीर कैकेय्याहं प्रचोदित:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
'वीर! अतः मैं अपने पिता की आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकता; क्योंकि पिता की आज्ञा से ही कैकेयी ने मुझे वन जाने का आदेश दिया था।'
 
'Veer! Therefore I cannot disobey my father's orders; because it was on my father's orders that Kaikeyi ordered me to go to the forest. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)