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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.21.10 
निर्मनुष्यामिमां सर्वामयोध्यां मनुजर्षभ।
करिष्यामि शरैस्तीक्ष्णैर्यदि स्थास्यति विप्रिये॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषश्रेष्ठ! यदि नगर की जनता विरोध में उठ खड़ी हुई, तो मैं अपने तीखे बाणों से सम्पूर्ण अयोध्या को मनुष्यों से शून्य कर दूँगा।
 
'Best of men! If the people of the city rise in protest, then I will make the whole Ayodhya empty of humans with my sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)