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ramayan 2.20.8: इधर, अपनी इन्द्रियों को वश में करने वाले श्री राम अपने स्वजनों का दुःख देखकर अत्यन्त दुःखी हो गए और हाथी के समान लम्बी साँसें लेते हुए अपने भाई लक्ष्मण के साथ अपनी माता के अन्तःकक्ष में गए।   |   ramayan सर्ग 2.20: राजा दशरथ की अन्य रानियों का विलाप, श्रीराम का कौसल्याजी को अपने वनवास की बात बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.20.8 
रामस्तु भृशमायस्तो नि:श्वसन्निव कुञ्जर:।
जगाम सहितो भ्रात्रा मातुरन्त:पुरं वशी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इधर, अपनी इन्द्रियों को वश में करने वाले श्री राम अपने स्वजनों का दुःख देखकर अत्यन्त दुःखी हो गए और हाथी के समान लम्बी साँसें लेते हुए अपने भाई लक्ष्मण के साथ अपनी माता के अन्तःकक्ष में गए।
 
Here, Sri Rama, who had controlled his senses, became very sad on seeing the sorrows of his relatives and taking long breaths like an elephant, went to his mother's inner chambers along with his brother Lakshmana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)