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ramayan 2.20.40: 'स्त्रियों के लिए इससे बढ़कर और क्या दुःख हो सकता है? इसलिए मेरा शोक और विलाप ऐसा है कि उसका अन्त ही नहीं होता ॥40॥   |   ramayan सर्ग 2.20: राजा दशरथ की अन्य रानियों का विलाप, श्रीराम का कौसल्याजी को अपने वनवास की बात बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.20.40 
अतो दु:खतरं किं नु प्रमदानां भविष्यति।
मम शोको विलापश्च यादृशोऽयमनन्तक:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
'स्त्रियों के लिए इससे बढ़कर और क्या दुःख हो सकता है? इसलिए मेरा शोक और विलाप ऐसा है कि उसका अन्त ही नहीं होता ॥40॥
 
'What can be a greater sorrow for women than this? Therefore my grief and lamentation is such that it never ends. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)