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ramayan 2.19.9: ‘इस लज्जाशील महाराज को मेरी ओर से आश्वासन देकर आश्वस्त करो। पृथ्वीनाथ पृथ्वी की ओर देखकर आँसू क्यों बहा रहे हैं?॥9॥   |   ramayan सर्ग 2.19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.19.9 
तथाश्वासय ह्रीमन्तं किं त्विदं यन्महीपति:।
वसुधासक्तनयनो मन्दमश्रूणि मुञ्चति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘इस लज्जाशील महाराज को मेरी ओर से आश्वासन देकर आश्वस्त करो। पृथ्वीनाथ पृथ्वी की ओर देखकर आँसू क्यों बहा रहे हैं?॥9॥
 
‘Assure this shy Maharaj by assuring him on my behalf. Why is Prithvi Nath shedding tears while looking at the earth?॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)