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ramayan 2.19.6: 'परन्तु केवल एक बात है जो मेरे हृदय को दुःख से जला रही है कि राजा ने स्वयं मुझसे भरत के राज्याभिषेक के विषय में कुछ नहीं कहा।   |   ramayan सर्ग 2.19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.19.6 
अलीकं मानसं त्वेकं हृदयं दहते मम।
स्वयं यन्नाह मां राजा भरतस्याभिषेचनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'परन्तु केवल एक बात है जो मेरे हृदय को दुःख से जला रही है कि राजा ने स्वयं मुझसे भरत के राज्याभिषेक के विषय में कुछ नहीं कहा।
 
'But there is only one thing which is burning my heart with sorrow that the King himself did not speak to me about Bharat's coronation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)