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ramayan 2.19.36: सत्यवादी श्री रामजी के निकट सदा रहने वाले उन तेजस्वी पुरुषों ने भी उनके मुख पर कभी कोई विकार नहीं देखा ॥36॥   |   ramayan सर्ग 2.19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.19.36 
सर्वोऽप्यभिजन: श्रीमान् श्रीमत: सत्यवादिन:।
नालक्षयत रामस्य कंचिदाकारमानने॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
सत्यवादी श्री रामजी के निकट सदा रहने वाले उन तेजस्वी पुरुषों ने भी उनके मुख पर कभी कोई विकार नहीं देखा ॥36॥
 
Even those glorious men who always stayed near the truthful Shri Ram never saw any disturbance on his face. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)