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ramayan 2.19.33: वे वन जाने के लिए आतुर थे और सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य त्याग रहे थे; फिर भी लोकों से पार हुए और जीवन्मुक्त महात्मा के समान उनके मन में कोई भी विक्षोभ नहीं था ॥33॥   |   ramayan सर्ग 2.19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.19.33 
न वनं गन्तुकामस्य त्यजतश्च वसुंधराम्।
सर्वलोकातिगस्येव लक्ष्यते चित्तविक्रिया॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वे वन जाने के लिए आतुर थे और सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य त्याग रहे थे; फिर भी लोकों से पार हुए और जीवन्मुक्त महात्मा के समान उनके मन में कोई भी विक्षोभ नहीं था ॥33॥
 
He was eager to go to the forest and was renouncing the kingdom of the entire earth; yet, like a Mahatma who has transcended the worlds and is liberated in life, no disturbance was observed in his mind. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)