Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.19.32: श्री रामजी अनन्त तेज से युक्त थे, इसलिए उस समय राज्य न मिलने से उन प्रियतम श्री रामजी के महान तेज में कोई अन्तर नहीं आ सका, जैसे चन्द्रमा का क्षीण होना उसके स्वाभाविक तेज को क्षीण नहीं कर सकता॥ 32॥ | ramayan सर्ग 2.19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चास्य महतीं लक्ष्मीं राज्यनाशोऽपकर्षति।
लोककान्तस्य कान्तत्वाच्छीतरश्मेरिव क्षय:॥ ३२॥
अनुवाद
श्री रामजी अनन्त तेज से युक्त थे, इसलिए उस समय राज्य न मिलने से उन प्रियतम श्री रामजी के महान तेज में कोई अन्तर नहीं आ सका, जैसे चन्द्रमा का क्षीण होना उसके स्वाभाविक तेज को क्षीण नहीं कर सकता॥ 32॥
Shri Ram was endowed with everlasting radiance, therefore not getting the kingdom at that time could not make any difference to the great splendor of that beloved Shri Ram, just like the waning of the moon cannot diminish its natural splendor.॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥