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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना
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श्लोक 27
श्लोक
2.19.27
रामस्य तु वच: श्रुत्वा भृशं दु:खगत: पिता।
शोकादशक्नुवन् वक्तुं प्ररुरोद महास्वनम्॥ २७॥
अनुवाद
श्री राम के ये वचन सुनकर पिता को बड़ा दुःख हुआ। शोक के कारण वे कुछ भी न बोल सके, केवल फूट-फूटकर रोने लगे॥ 27॥
Hearing these words of Shri Ram, the father was very sad. Due to the grief he could not say anything, he only started crying profusely.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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