श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.19.25 
यावन्मातरमापृच्छे सीतां चानुनयाम्यहम्।
ततोऽद्यैव गमिष्यामि दण्डकानां महद् वनम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'ठीक है! अब मैं माता कौशल्या से अनुमति लेकर सीता को भी मना लूँगा। इसके बाद आज ही विशाल दण्डक वन की यात्रा करूँगा।॥ 25॥
 
'Okay! Now I will take permission from mother Kausalya and convince Sita as well. After this, I will travel to the huge Dandaka forest today itself.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)