Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.19.22: 'अपने पिता की सेवा करने अथवा उनकी आज्ञा का पालन करने से बढ़कर संसार में कोई दूसरा धर्म नहीं है ॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 2.19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.19.22 
न ह्यतो धर्मचरणं किंचिदस्ति महत्तरम्।
यथा पितरि शुश्रूषा तस्य वा वचनक्रिया॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'अपने पिता की सेवा करने अथवा उनकी आज्ञा का पालन करने से बढ़कर संसार में कोई दूसरा धर्म नहीं है ॥ 22॥
 
'There is no other religious practice in the world more important than serving one's father or obeying his orders. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)