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ramayan 2.19.14: 'किन्तु राम! आप स्वयं वन जाने के लिए उत्सुक प्रतीत होते हैं; अतः मैं आपके विलम्ब करने को उचित नहीं समझता। आपको यहाँ से शीघ्र ही प्रस्थान करके वन में चले जाना चाहिए॥ 14॥   |   ramayan सर्ग 2.19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.19.14 
तव त्वहं क्षमं मन्ये नोत्सुकस्य विलम्बनम्।
राम तस्मादित: शीघ्रं वनं त्वं गन्तुमर्हसि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'किन्तु राम! आप स्वयं वन जाने के लिए उत्सुक प्रतीत होते हैं; अतः मैं आपके विलम्ब करने को उचित नहीं समझता। आपको यहाँ से शीघ्र ही प्रस्थान करके वन में चले जाना चाहिए॥ 14॥
 
'But Rama! You yourself seem eager to go to the forest; therefore I do not think it right for you to delay. You should leave from here and go to the forest as soon as possible.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)