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ramayan 2.19.1: वे अप्रिय और मृत्यु के समान दुःखदायी वचन सुनकर भी शत्रुघ्न श्री राम विचलित नहीं हुए। उन्होंने कैकेयी से इस प्रकार कहा -॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.19.1 
तदप्रियममित्रघ्नो वचनं मरणोपमम्।
श्रुत्वा न विव्यथे राम: कैकेयीं चेदमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वे अप्रिय और मृत्यु के समान दुःखदायी वचन सुनकर भी शत्रुघ्न श्री राम विचलित नहीं हुए। उन्होंने कैकेयी से इस प्रकार कहा -॥1॥
 
Even after hearing those unpleasant and death-like painful words, Shatrughan Shri Ram did not get upset. He said to Kaikeyi in this manner -॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)