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ramayan 2.18.9: "अन्य दिनों में तो मेरे पिता क्रोधित होने पर भी मुझे देखकर प्रसन्न हो जाते थे। आज मुझे देखकर उन्हें दुःख क्यों हो रहा है?" ॥9॥   |   ramayan सर्ग 2.18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.18.9 
अन्यदा मां पिता दृष्ट्वा कुपितोऽपि प्रसीदति।
तस्य मामद्य सम्प्रेक्ष्य किमायास: प्रवर्तते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
"अन्य दिनों में तो मेरे पिता क्रोधित होने पर भी मुझे देखकर प्रसन्न हो जाते थे। आज मुझे देखकर उन्हें दुःख क्यों हो रहा है?" ॥9॥
 
"On other days my father used to become happy on seeing me even when he was angry. Why is he feeling pain on looking at me today?" ॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)