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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.18.41 
इतीव तस्यां परुषं वदन्त्यां
न चैव राम: प्रविवेश शोकम्।
प्रविव्यथे चापि महानुभावो
राजा च पुत्रव्यसनाभितप्त:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
कैकेयी के इतने कठोर वचनों के बाद भी श्री राम का हृदय दुःखी नहीं हुआ, किन्तु राजा दशरथ अपने पुत्र से भावी वियोग की कल्पना करके व्यथित और व्यथित हो गए।
 
Even after such harsh words from Kaikeyi, Sri Rama's heart did not feel sad, but the noble King Dasharatha became distressed and distressed at the thought of the future separation from his son.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डेऽष्टादश: सर्ग:॥ १८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें अठारहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)