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तत्र मे याचितो राजा भरतस्याभिषेचनम्।
गमनं दण्डकारण्ये तव चाद्यैव राघव॥ ३३॥
अनुवाद
'राघव! मैंने एक वरदान के द्वारा राजा से यह प्रार्थना की है कि भरत को राजा बनाया जाए और दूसरे वरदान के द्वारा मैंने आपसे आज ही दण्डकारण्य में भेज देने को कहा है।
'Raghava! Through one of those boons, I have requested the King that Bharata be crowned king and through the other boon, I have asked for you to be sent to Dandakaranya today itself.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥