श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 16: सुमन्त्र का श्रीराम को महाराज का संदेश सुनाना,श्रीराम का मार्ग में स्त्री पुरुषों की बातें सुनते हुए जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.16.5 
तानुवाच विनीतात्मा सूतपुत्र: प्रदक्षिण:।
क्षिप्रमाख्यात रामाय सुमन्त्रो द्वारि तिष्ठति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजसेवा में अत्यन्त कुशल और विनम्र हृदय वाले सूतपुत्र सुमन्त्र ने उनसे कहा- ‘तुम लोग शीघ्र जाकर श्री रामचन्द्र जी से कहो कि सुमन्त्र द्वार पर खड़े हैं।’॥5॥
 
Sumantra, the son of Suta, who was very skilled in the royal service and had a humble heart, said to him - 'You people should quickly go and tell Shri Ramchandra ji that Sumantra is standing at the door'. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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