श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 16: सुमन्त्र का श्रीराम को महाराज का संदेश सुनाना,श्रीराम का मार्ग में स्त्री पुरुषों की बातें सुनते हुए जाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.16.44 
एष श्रियं गच्छति राघवोऽद्य
राजप्रसादाद् विपुलां गमिष्यन्।
एते वयं सर्वसमृद्धकामा
येषामयं नो भविता प्रशास्ता॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
वे कहते थे, 'इस समय महाराज दशरथ की कृपा से श्री रामचन्द्रजी को महान् धन की प्राप्ति होने वाली है। अब हम सबकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी, क्योंकि श्री राम हमारे शासक होंगे॥ 44॥
 
They used to say, 'At this time, Shri Ramchandraji is going to inherit a great wealth by the grace of Maharaj Dashrath. Now all the desires of all of us will be fulfilled because Shri Ram will be our ruler.॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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