श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 16: सुमन्त्र का श्रीराम को महाराज का संदेश सुनाना,श्रीराम का मार्ग में स्त्री पुरुषों की बातें सुनते हुए जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.16.20 
हन्त शीघ्रमितो गत्वा द्रक्ष्यामि च महीपतिम्।
सह त्वं परिवारेण सुखमास्स्व रमस्व च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अतः मैं शीघ्र ही यहाँ से प्रसन्नतापूर्वक जाकर महाराज के दर्शन करूँगा। तुम यहाँ अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक बैठकर आनन्द मनाओ॥20॥
 
‘Therefore I will happily go from here as soon as possible and have the darshan of Maharaj. You sit here comfortably with your family and enjoy.’॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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