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श्लोक 2.16.20  |
हन्त शीघ्रमितो गत्वा द्रक्ष्यामि च महीपतिम्।
सह त्वं परिवारेण सुखमास्स्व रमस्व च॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| अतः मैं शीघ्र ही यहाँ से प्रसन्नतापूर्वक जाकर महाराज के दर्शन करूँगा। तुम यहाँ अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक बैठकर आनन्द मनाओ॥20॥ |
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| ‘Therefore I will happily go from here as soon as possible and have the darshan of Maharaj. You sit here comfortably with your family and enjoy.’॥ 20॥ |
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