Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.15.48: जैसे मगरमच्छ रत्नों से भरे हुए समुद्र में बिना रोक-टोक के प्रवेश कर जाता है, उसी प्रकार सारथी सुमन्तराम पर्वत शिखर पर आरूढ़ होकर उस विशाल विमान के समान, स्थिर मेघ के समान शोभायमान, सुन्दर भवनों से युक्त तथा रत्नों के प्रचुर भण्डारों से युक्त उस महल में बिना रोक-टोक के प्रवेश कर गए। | ramayan सर्ग 2.15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे मगरमच्छ रत्नों से भरे हुए समुद्र में बिना रोक-टोक के प्रवेश कर जाता है, उसी प्रकार सारथी सुमन्तराम पर्वत शिखर पर आरूढ़ होकर उस विशाल विमान के समान, स्थिर मेघ के समान शोभायमान, सुन्दर भवनों से युक्त तथा रत्नों के प्रचुर भण्डारों से युक्त उस महल में बिना रोक-टोक के प्रवेश कर गए।
Just as a crocodile enters without hindrance a sea filled with abundant gems, so charioteer Sumantram, mounted on a mountain peak, entered without hindrance that palace, which was like a huge plane, graceful like a motionless cloud, fitted with beautiful houses and filled with abundant treasures of gems.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे पञ्चदश: सर्ग:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें पंद्रहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥१५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥