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श्लोक  2.15.32 
काञ्चनप्रतिमैकाग्रं मणिविद्रुमतोरणम्।
शारदाभ्रघनप्रख्यं दीप्तं मेरुगुहासमम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इसका मुख्य द्वार स्वर्णिम देव मूर्तियों से अलंकृत था। इसका बाहरी द्वार रत्नों और मोतियों से जड़ा हुआ था। सम्पूर्ण भवन शरद ऋतु के मेघों के समान श्वेत आभा से प्रकाशित था और मेरु पर्वत की गुफा के समान शोभायमान था। 32.
 
Its main front was decorated with golden idols of gods. Its outside gate was studded with gems and pearls. The whole building was illuminated with white luster like the autumn clouds and looked beautiful like the cave of Mount Meru. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)