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ramayan 2.15.30-31: तत्पश्चात सुमन्तराम ने श्री राम का सुन्दर महल देखा, जो कैलाश पर्वत के समान श्वेत प्रकाश से जगमगा रहा था। वह इन्द्र भवन के समान चमक रहा था। उसका द्वार विशाल किवाड़ों से बंद था (केवल उसके अन्दर एक छोटा सा द्वार खुला था)। सैकड़ों वेदियाँ उस महल की शोभा बढ़ा रही थीं।   |   ramayan सर्ग 2.15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  2.15.30-31 
ततो ददर्श रुचिरं कैलाससदृशप्रभम्॥ ३०॥
रामवेश्म सुमन्त्रस्तु शक्रवेश्मसमप्रभम्।
महाकपाटपिहितं वितर्दिशतशोभितम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात सुमन्तराम ने श्री राम का सुन्दर महल देखा, जो कैलाश पर्वत के समान श्वेत प्रकाश से जगमगा रहा था। वह इन्द्र भवन के समान चमक रहा था। उसका द्वार विशाल किवाड़ों से बंद था (केवल उसके अन्दर एक छोटा सा द्वार खुला था)। सैकड़ों वेदियाँ उस महल की शोभा बढ़ा रही थीं।
 
Thereafter Sumantram saw the beautiful palace of Shri Ram, which was shining with white light like Mount Kailash. It was shining like Indra Bhawan. Its gate was closed with huge doors (only a small door inside it was open). Hundreds of altars were enhancing the beauty of that palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)