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ramayan 2.15.19: वह राजभवन सुमन्तराम के लिए सदैव खुला रहता था। वे भीतर गए और भीतर जाकर उन्होंने महाराज के वंश की प्रशंसा की॥19॥   |   ramayan सर्ग 2.15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.15.19 
सदा सक्तं च तद् वेश्म सुमन्त्र: प्रविवेश ह।
तुष्टावास्य तदा वंशं प्रविश्य स विशाम्पते:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह राजभवन सुमन्तराम के लिए सदैव खुला रहता था। वे भीतर गए और भीतर जाकर उन्होंने महाराज के वंश की प्रशंसा की॥19॥
 
That royal palace was always open for Sumantram. He entered inside and after entering he praised the lineage of the Maharaja.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)