Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.14.9: ‘धर्म के इच्छित फल के लिए तथा मेरी प्रेरणा से भी आप अपने पुत्र श्री राम को घर से निकाल दें।’ मैं अपनी यह बात तीन बार दोहराता हूँ।   |   ramayan सर्ग 2.14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.14.9 
धर्मस्यैवाभिकामार्थं मम चैवाभिचोदनात्।
प्रव्राजय सुतं रामं त्रि: खलु त्वां ब्रवीम्यहम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘धर्म के इच्छित फल के लिए तथा मेरी प्रेरणा से भी आप अपने पुत्र श्री राम को घर से निकाल दें।’ मैं अपनी यह बात तीन बार दोहराता हूँ।
 
‘For the desired result of Dharma and also on my inspiration, you should expel your son Shri Ram from the house. I repeat this statement of mine three times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)