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ramayan 2.14.7: 'सत्य ही प्रणव शब्दब्रह्म है, सत्य में ही धर्म प्रतिष्ठित है, सत्य ही अविनाशी वेद है और सत्य के द्वारा ही परब्रह्म की प्राप्ति होती है। 7॥   |   ramayan सर्ग 2.14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.14.7 
सत्यमेकपदं ब्रह्म सत्ये धर्म: प्रतिष्ठित:।
सत्यमेवाक्षया वेदा: सत्येनावाप्यते परम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'सत्य ही प्रणव शब्दब्रह्म है, सत्य में ही धर्म प्रतिष्ठित है, सत्य ही अविनाशी वेद है और सत्य के द्वारा ही परब्रह्म की प्राप्ति होती है। 7॥
 
'Truth itself is the Pranavarva Shabdabraham, religion is established in truth only, truth itself is the imperishable Veda and only through truth one can attain Parabrahma. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)