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ramayan 2.14.56-57h: 'जैसे चरवाहों के बिना पशु, सेनापति के बिना सेना, चन्द्रमा के बिना रात्रि और बैल के बिना गायें सौंदर्यहीन होती हैं, उसी प्रकार जिस राष्ट्र में राजा नहीं दिखाई देता, उसकी दशा होती है।' ॥56 1/2॥   |   ramayan सर्ग 2.14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  2.14.56-57h 
यथा ह्यपाला: पशवो यथा सेना ह्यनायका।
यथा चन्द्रं विना रात्रिर्यथा गावो विना वृषम्॥ ५६॥
एवं हि भविता राष्ट्रं यत्र राजा न दृश्यते।
 
 
अनुवाद
'जैसे चरवाहों के बिना पशु, सेनापति के बिना सेना, चन्द्रमा के बिना रात्रि और बैल के बिना गायें सौंदर्यहीन होती हैं, उसी प्रकार जिस राष्ट्र में राजा नहीं दिखाई देता, उसकी दशा होती है।' ॥56 1/2॥
 
'Just as animals without shepherds, an army without a commander, a night without the moon and cows without a bull are without beauty, the same is the condition of a nation where the king is not seen.' ॥ 56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)