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ramayan 2.14.53: 'राजसिंह! भगवती रात्रिदेवी विदा हो गई हैं। आपने जिस कार्य के लिए आज्ञा दी थी, वह सब पूर्ण हो गया है। आप इसे जान लें और इसके बाद शेष अभिषेक का कार्य पूर्ण करें।॥ 53॥   |   ramayan सर्ग 2.14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.14.53 
गता भगवती रात्रि: कृतं कृत्यमिदं तव।
बुध्यस्व नृपशार्दूल कुरु कार्यमनन्तरम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
'राजसिंह! भगवती रात्रिदेवी विदा हो गई हैं। आपने जिस कार्य के लिए आज्ञा दी थी, वह सब पूर्ण हो गया है। आप इसे जान लें और इसके बाद शेष अभिषेक का कार्य पूर्ण करें।॥ 53॥
 
‘Rajasingh! Bhagwati Ratri Devi has departed. All the work for which you had given orders has been completed. You should know this and after this, complete the remaining work of Abhishek.॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)