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ramayan 2.14.45: सुमन्त्र राजा के पास जाकर खड़ा हो गया। उसे राजा की स्थिति का पता नहीं था, इसलिए उसने बड़े ही संतोषप्रद शब्दों में उसकी प्रशंसा करने की तैयारी की।   |   ramayan सर्ग 2.14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.14.45 
स समीपस्थितो राज्ञस्तामवस्थामजज्ञिवान्।
वाग्भि: परमतुष्टाभिरभिष्टोतुं प्रचक्रमे॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
सुमन्त्र राजा के पास जाकर खड़ा हो गया। उसे राजा की स्थिति का पता नहीं था, इसलिए उसने बड़े ही संतोषप्रद शब्दों में उसकी प्रशंसा करने की तैयारी की।
 
Sumantr went and stood near the king. He was unaware of his condition; therefore he prepared to praise him with very satisfying words. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)