Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.12.76: 'ओह! मैं तो तुम्हें बहुत ही गुणवान स्त्री समझता था, परन्तु तुम तो बड़ी दुष्ट निकलीं; जैसे कोई व्यक्ति स्वादिष्ट लगने वाली मदिरा पीता है, परन्तु जब उसे पता चलता है कि उसमें विष मिला हुआ है। | ramayan सर्ग 2.12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'ओह! मैं तो तुम्हें बहुत ही गुणवान स्त्री समझता था, परन्तु तुम तो बड़ी दुष्ट निकलीं; जैसे कोई व्यक्ति स्वादिष्ट लगने वाली मदिरा पीता है, परन्तु जब उसे पता चलता है कि उसमें विष मिला हुआ है।
'Oh! I thought you were a very virtuous woman, but you turned out to be a very wicked woman; just like a person who drinks wine which looks delicious, only to realise from the deterioration it causes that it was mixed with poison.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥