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ramayan 2.12.40: हे धर्म के ज्ञाता राजन! जब बहुत से राजर्षि (राजा) एकत्र होकर आपके द्वारा मुझे दिए गए वरदान के विषय में आपसे चर्चा करेंगे, उस समय आप उन्हें क्या उत्तर देंगे?॥40॥   |   ramayan सर्ग 2.12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.12.40 
यदा समेता बहवस्त्वया राजर्षय: सह।
कथयिष्यन्ति धर्मज्ञ तत्र किं प्रतिवक्ष्यसि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म के ज्ञाता राजन! जब बहुत से राजर्षि (राजा) एकत्र होकर आपके द्वारा मुझे दिए गए वरदान के विषय में आपसे चर्चा करेंगे, उस समय आप उन्हें क्या उत्तर देंगे?॥40॥
 
'O King, knower of Dharma! When many Rajrishis (kings) gather together and discuss with you about the boon you have given me, what answer will you give them at that time?॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)