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ramayan 2.12.100: 'स्त्रियाँ शापित हैं, क्योंकि वे बेईमान और स्वार्थी हैं; परन्तु मैं सभी स्त्रियों के लिए ऐसा नहीं कह सकता; मैं तो केवल भरत की माता की निन्दा करता हूँ ॥ 100॥   |   ramayan सर्ग 2.12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.12.100 
धिगस्तु योषितो नाम शठा: स्वार्थपरायणा:।
न ब्रवीमि स्त्रिय: सर्वा भरतस्यैव मातरम्॥ १००॥
 
 
अनुवाद
'स्त्रियाँ शापित हैं, क्योंकि वे बेईमान और स्वार्थी हैं; परन्तु मैं सभी स्त्रियों के लिए ऐसा नहीं कह सकता; मैं तो केवल भरत की माता की निन्दा करता हूँ ॥ 100॥
 
'Women are to be cursed because they are dishonest and selfish; but I cannot say this for all women; I only condemn Bharat's mother.॥ 100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)