श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.119.6 
अग्निहोत्रे च ऋषिणा हुते च विधिपूर्वकम्।
कपोताङ्गारुणो धूमो दृश्यते पवनोद्धत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'महर्षि (अत्रि) ने अग्निहोत्र-सम्बन्धी अनुष्ठान विधिपूर्वक किया है, इसलिए यह काला धुआँ कबूतर के गले के समान वायु के वेग से ऊपर की ओर उठता हुआ दिखाई दे रहा है। 6॥
 
'Maharishi (Atri) has duly performed the rituals related to Agnihotra, hence this black smoke is visible like the throat of a pigeon, rising upwards with the speed of the wind. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)