श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.119.5 
एते चाप्यभिषेकार्द्रा मुनय: कलशोद्यता:।
सहिता उपवर्तन्ते सलिलाप्लुतवल्कला:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'ये ऋषिगण जल में भीगी हुई छाल धारण किए हुए, स्नान के कारण भीगे हुए शरीर वाले, जल से भरे हुए घड़े लिए हुए, एक साथ अपने आश्रम की ओर लौट रहे हैं॥5॥
 
'These sages, wearing barks soaked in water and their bodies looking moist due to bathing, are returning together to their hermitage, carrying pitchers filled with water.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)